Beginner Blogger Ko 20 Technical Things Ke Bare Me Janna Chahiye

Hello friends, क्या आप एक ब्लॉगर हो? या फिर ब्लॉगिंग करना चाहते हो? ब्लॉग बनाने से पहले आज हम आपको कुछ technical बातों के बारे में बताएंगे जो आप जिसके बारे में जानना आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है. अगर आप new blogger हो तो हो सकता है, की आप कभी कभी कुछ ऐसे words सुनते या कही देखते होंगे, जिसके बारे में आपको पता नही हो. इन सभी basic चीजों के बारे में जानना आपके लिए जरूरी है. इसलिए इस post में हम इसी को cover करेंगे।
20 technical thing should to know a blogger

आज के समय मे “Blogging” शब्द पूरी दुनियाँ चर्चित हैं. परंतु हमारे भारत में अभी भी बहुत सारे लोगों को इसके बारे में पता नही है. पिछले कुछ सालों में हमारे यहाँ भी Bloggers की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसका सबसे बड़ा कारण है, internet connection का सस्ता हो जाना. यहाँ पर बहुत ही कम cost मे connection मिल जाती है. इसी कारण से India में अभी करोड़ों नए internet users आ गए हैं।

आज के समय मे लाखों लोग ब्लॉगिंग करके अच्छी income कर रहे हैं. उनके लिए blogging ही इनकम करने का स्रोत बन गया है. आज लोग ब्लॉगिंग को अपनी career के रूप में भी चुनने लगे हैं. क्योंकि यह घर बैठे internet के माध्यम से पैसे कमाने का सबसे सरल और अच्छा तरीका है।

आज लोग जब किसी बड़े ब्लॉगर के site में visit करते हैं तो उनकी income को देखकर उनके मन मे भी ब्लॉगिंग करने का उत्साह जग जाता है. शुरू शुरू में उन्हें लगता है कि ब्लॉगिंग करना बेहद easy है. वो सोचते हैं कि ब्लॉग बनाना है और उसमें नए नए articles लिखना है. पर उन्हें पता नही होता है कि एक article लिखने में कितनी परेशानी होती है और कितना समय लगता है?

यदि आप भी एक ब्लॉगर हो या फिर ब्लॉगिंग करना चाहते हो तो आपको इस field में बहुत सारी बातों के बारे में जानकारी नही होगी. अगर आप blogging field में हो तो ये words अक्सर आपको सुनने को मिलेगा. लेकिन आपको इसके बारे में पता नही होगा तो कोई फायदा नही होगा।

Often, मेरे visitors मुझसे कई सारे blogging से related common things के बारे में comment section में पूछते हैं. इसलिए हमने यह post लिखने का निर्णय लिया है. ताकि हमारे beginner bloggers को इसके बारे में ठीक से जानकारी मिल पाए. जहाँ तक हो सके में आपको details में इसके बारे में बताने की कोशिश करूँगा. यदि फिर भी आपके मन मे कोई प्रश्न हो तो comment करके जरूर पूछिये।

28 Technical Things to Know As A Blogger.

Domain Name, Webpage, Website , URL और Subdomain के बीच क्या difference है?

चलिए हम नीचें इन सबके बारे में details में बताते हैं. ताकि आप इन्हें अच्छे से समझ पाओ।

Domain name: यह आपके website का address होता है. जिस तरह आपको किसी के घर जाना होता है तो उसके address में जाते हो. उसी तरह अगर किसी को आपके website में visit करना है तो वो अपने browser में आपका domain name type करेगा और वो आपके site को access कर पायेगा।

Basically, हमारा domain name-server (DNA) के द्वारा हमारे hosting account से जुड़ा होता है. Name servers हमारे web browser को ये कहता है कि files किस hosting में और कहाँ located है. उसके बाद ही browser hosted files को display या run कर पता है।
Eg: example.com

Webpage: एक website किसी भी site का single page होता है. यानी किसी भी single page को ही webpage कहते हैं.
Eg: https://example.com/mypage.html

Website: Webpages के collections को ही website कहते हैं. इसमे सारे pages के साथ साथ homepage भी होता है. इसमे unlimited webpages भी हो सकते हैं।

URL: URL (uniform resource locator) किसी server में कोई particular location को specify करता है.
Eg: https://www.example.com/category/wordpress/page/10

Homepage: Homepage किसी website का first page होता है. इसे front page या index page भी कहते हैं. जब कोई अपने browser में domain एंटर करके visit करता है तो वो सबसे पहले homepage में ही visit करता है.
Eg: https://example.com

Subdomain: एक subdomain भी एक domain होता है लेकिन यह किसी दूसरे main domain का एक part होता है. अगर आप नही समझे तो नीचे example को देखिए।

Eg: forum.yourdomain.com

ऊपर उदाहरण में yourdomain.com एक main domain है और इसके पहले forum (forum.yourdomain.com) होने से subdomain हो गया. आप submain को किसी website के लिए भी use कर सकते हो.

HTTP और HTTPS क्या है?

HTTP HyperText Transfer Protocol के लिए होता है. यह protocol ये define करता है कि server और browser के बीच information को संचारित कैसे किया जाए? HTTP एक insecure protocol होता है और यह information को बिना encryption के संचारित करता है. मतलब यह server और browser के बीच information transfer करने के लिए password का use नही करता है. इसमे hacker attack करके data चोरी कर सकता है।

अगर हम HTTPS की बात करें तो यह secured protocol होता है. यह server और browser के बीच information transfer के लिए encryption का use करता है. इसमे users का information चोरी होने का खतरा नही होता है और यह बिल्कुल safe होता है. इसलिए banking और बड़े बड़े websites में https का use होता है. अब तो google भी सभी websites के लिए https recommend कर रहा है।

Web Hosting Server क्या होता है?

Web hosting हमें इंटरनेट पर space provide करते हैं. जिससे हम files को online store कर पाते हैं. हमारे website की सभी data होस्टिंग पर ही store होता है. जब कोई visitor हमारे site में visit करते है तो hosting server से files load होते हैं. इसलिए हमारे hosting server का 24/7 online रहना जरूरी होता है.

Domain IP Address क्या होता है?

IP address किसी domain का numeric presentation होता है.

सभी domain के पास अपना IP address होता है लेकिन यह background में work करता है और हमारे लिए visible नही होता है. IP addressआपके hosting server decide करता है. आप shared hosting use करते हो तो आपको shared ip मिलेगा. अर्थात एक ही ip में कई सारे websites होंगे.

अगर आप dedicated hosting use करते हो तो आपको अपना खुद का ip address मिलेगा. जिसमे सिर्फ आपका site ही होगा. Example के लिए आप Google को domain के अलावा इसके ip address 216.58.194.78 से भी visit कर सकते।

आप किसी domain का ip address को इस टूल3 से पता कर सकते हो: https://www.site24x7.com/find-ip-address-of-web-site.html

cPanel और WHM क्या होता है?

cPanel एक बहुत ही popular control panel है जो सभी linux web hosting provider offer करते हैं. यह आपको hosting account को manage करने के लिए allow करता है. इसमें बहुत सारे features और options होते हैं, जिससे आप आसानी से hosting को manage कर पाते हैं. अगर आप linux hosting पर हो तो आप cPanel को access कर सकते हो।

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आप http://yourdomain.com/cpanel (यहाँ ‘yourdomain.com’ की जगह अपना domain replace करें) से अपने hosting cpanel में लॉगिन कर सकते हो. याद रहे cpanel में login करने के लिए username और password चाहिए जो आपको hosting provider से मिलेगी।

अगर हम WHM (Web hosting manager) की बात करें तो यह एक cPanel इसका ही एक extension होता है. यह बहुत सारे cPanel accounts को manage करने के लिए allow करता है. इससे आप दूसरे users को hosting provide कर सकते हो. यह reseller hosting, VPS या dedicated server में available होते हैं.

MySQL Databases क्या होते हैं?

MySQL एक open source database management system है. ज्यादातर linux server में mysql database ही होते हैं. आपके through आप आसानी से अपने database को manage कर पाएंगे.

आपके hosting कम से कम एक database को तो allow करेगा ही. कई सारे hosting unlimited database भी offer करते हैं. ये आपके hosting plan पर depend करता है।

जब आप अपना ब्लॉग wordpress ओर बनाएंगे तो उसमें एक domain के लिए सिर्फ एक ही database चाहिए. जिसमे आपके ब्लॉग की सारे contents और settings store रहते हैं. Web hosting किसी भी site को host करने के लिए 2 तरह के space देते हैं, जिसमे ‘server space’ + ‘MYSQL database space’ होते हैं. चलिए इन दोनों के बारे में जानते हैं।

Web Server Space: इसमे HTML pages, wordpress installation files, CSS stylesheets, Javascript और सभी images store होते हैं. web server database से भी interact कर सकता है.

MYSQL Database Server: यह वो जगह होते हैं, जहाँ पर हमारे site की सभी content (post, pages, etc.) और भी कई सारे data stored होते हैं. इसमे सारी informations को table में arrange किया जाता है.

phpMyAdmin क्या होता है?

जिस तरह हमने आपको ऊपर mysql database के बारे में बताया, अब हम आपको बता दें कि हमें hosting server पर हमारे database को manage (add, edit, delete, move, copy, download) करने के लिए phpMyAdmin होता है. इसके द्वारा अपने site की database का backup manually भी download कर सकते हैं. यह सभी hosting के cpanel में पाए जाते हैं।

Public_HTML क्या होता है?

यदि आप एक ब्लॉगर हो और आपका ब्लॉग wordpress है तो आप public_html के बारे में जानते होंगे या कही जरूर देखा होगा. हमारे hosting के file manager में एक folder होता है, जिसका नाम public_html होता है. इस folder के content हो आप अपने domain से publicly access करा सकते हैं. हालांकि, आप इसके permission को change करके private भी कर सकते हो.

For example, यदि आप अपने root directory के public_html folder में कोई html file को myweb.html के नाम से वहाँ पर save कर दिए तो आप इसे http://yourdomain.com/myweb.html से open करेंगे तो html file run करने लगेगा।

इसी तरह wordpress में भी होता है. इसमे ज्यादातर php use किया गया है और php से mysql को connect किया गया है.

अगर आपको अभी इसके बारे में समझ मे नही आ रहा है तो पहले hosting खरीद लीजिए. उसके बाद धीरे धीरे आपको इसके बारे में बहुत अच्छे से समझ मे आ जायेगा।

FTP और SFTP क्या होता है?

FTP एक बहुत अच्छा तरीका है, अपने computer से files को web server तक transfer करने का. अगर हम आपको simple word में बताएं तो अपने phone या computer से किसी भी files को web hosting में upload करने की जरिया को ही FTP कहा जाता है. आप इस तरह से भी समझ सकते हो कि FTP एक जहाज है जो समान को एक port से दूसरे port तक ले जाने का काम करता है।

FTP के द्वारा files को transfer करने के लिए आपको एक FTP client (FTP Software) की जरूरत होगी. जैसे Filezilla या WinSCP

आप इस software का use करके simply अपने computer से files को hosting server पर upload कर सकते हो और साथ साथ अपने hosting server से किसी file को अपने computer में download कर सकते हो।

Example के लिए, जैसे कि आपको अपने website की सभी html, php, JavaScript, images और भी कई files को public_html में store करना होता है. आप FTP के द्वारा किसी file को अपने computer से public_html में store कर सकते हो।

परंतु FTP एक insecure mode है, files transfer करने के लिए. क्योंकि आपके data को encrypt नही करता है. यानी आपके server की username, password और आपको जो data transfer कर रहे हैं, उसे कोई भी access कर सकता है. इससे आप hackers के निशाने पर आ सकते हो।

इसलिए better तरीका यह है कि SFTP को अपने files को transfer करने के लिए use कीजिये. यह भी ठीक उसी तरह काम करता है, जिस तरह FTP काम करता है लेकिन यह हमारे सभी data को encrypt करके ही उसे server को transfer करता है. जिससे हमारे data को कोई दूसरा access नही कर पाता हूं.

Filezilla और WinSCP भी आपको SFTP allow करता है. यह दोनों best software हैं।

अभी ज्यादातर hosting provider cpanel offer करते है और यदि आपके hosting में cpanel होगी तो ftp या sftp की कोई जरूरत नही होगी. क्योंकि इसमें file manager होते हैं, जिससे आप web hosting को manage कर सकते हो. लेकिन यदि आप digital ocean जैसे hosting को use करेंगे तो इसमें आपको ftp या sftp का use करके file transfer करना होगा।

.Htaccess File क्या होता है?

कोई .htaccess file एक configuration file होता है. यह आपके hosting की root directory या फिर folder में हो सकता है।

Normally, हम किसी पूरे website को control करने के लिए .htaccess file को root directory (public_html) में रखते हैं.

किसी भी website को loading करने से पहले server उसकी .htaccess file को check करता है ताकि कोई rule set किया रहे तो उसे follow कर पाए. Example के तौर पर अगर आप अपने directory में किसी particular file या folder को access करने से block करना चाहते हो या किसी url को दूसरे link में redirect करना है तो इसके लिए आपको .htaccess की file में rule set करना होगा.

हम आपको नीचे कुछ काम बता रहे हैं, जिन्हें आप .htaccess के through आसानी से कर सकते हो।

  • किसी file, folder या directory को access करने के लिए allow/block कर सकते हो।
  • किसी certain ip address को site access करने के लिए allow/block कर सकते हो।
  • Website, directory, folder या file को किसी दूसरे location में redirect कर सकते हो।
  • किसी website को http से https या https से http version में redirect कर सकते हो।
  • आप www को non-www और non-www को www में redirect कर सकते हो।
  • किसी file/folder/directory को password से protect कर सकते हो।
  • Directory browsing को disable के सकते हो।
  • इसका use का caching के लिए और speed optimization के लिए भी कर सकते हो।

HTML, Php, CSS और Javascript क्या होता है?

HTML: HTML यानी Hypertext Markup Language एक language है, जिसे किसी webpage में markup (tag) करने के लिए use किया जाता है. जिससे बाद में उसे style या function run कर पाता है। web browser किसी webpage का markup और stylesheet को read करके उसे show करता है. यह किसी भी webpage के लिए skeleton system की तरह work करता है.

PHP: यह एक scripting language होता है, जिसे dynamic या interesting webpage को बनाने में use किया जाता है. PHP को mysql database से connect और इसमे changes करने के लिए भी use किया जाता है. यह किसी data को database से ले सजता है और एक dynamic page बना सकता है।

Example के तौर पर wordpress में php और mysql database का ही use हुआ है. जिससे wordpress अपने सारे posts, pages, and other contents को database में save करके रखता है।

Javascript: यह भी web language ही है, जिससे आप किसी webpage को dynamic बना सकते हो. Normally, हम इसका use किसी html web page में interactive elements को add करने में या उसको ज्यादा dynamic बनाने के लिए करते हैं. इसके साथ साथ आपको ये भी बताते चलें कि यह बहुत slow load होने वाला coding language है. इसलिए एक fast website बनाने के लिए javascript का use करने से बचें।

Ajax: यह एक technology है, किसी webpage में उसे बिना reload किये changes लाने के लिए. कई सारे website आप किसी form को submit करते समय देखा होगा कि जब हम submit बटन पर click करते हैं तो वहाँ बिना reload हुए ही submit successful का massage show होता है. इसके लिए ajax का ही use किया जाता है।

HTML Source Page क्या होता है? और इसे कैसे देखें?

किसी website या webpage का html source
check करना उसके skeleton देखने जैसा है. इससे आपको उस webpage को design करने के ढाँचे के बारे में पता चल जाएगा. आप किसी site का css, javascript, html को copy कर सकते हो लेकिन उसकी php को copy नही कर सकते हो.

यदि आप किसी दूसरे website की तरह अपने site को design करना चाहते हो तो इसके लिए आप उस site का html source check करके idea ले सकते हो।

किसी भी site का html source code check करने के लिए CTRL + U keys का use कर सकते हो. इसके अलावा आप किसी android phone में chrome browser से source code check कएने के लिए webpage url के पहले view-source: add कर दीजिए. जैसे view-source:http://example.com

Fixed, Fluid And Responsive Layout क्या होते हैं?

ये सारे different ways होते हैं, किसी webpage को css द्वारा layout design करने के लिए।

Fixed Layout (Static Layout): इस तरह के layout में webpage का layout fixed होता है. यानी webpage हर device में एक ही resolution से दिखता है.

Example के तौर पर यदि आप किसी fixed layout वाले site को mobile, tablet, या computer से open करेंगे तो तीनों में एक ही width और height होगी. आपने बहुत बार इस तरह से site में visit भी किया होगा।

Fluid Layout (Liquid layout): एक Fluid Layout अपने आप को अलग अलग screen में fit होने के लिए अपने आप resize (resizes the width) कर लेता है. इसका मतलब यह है कि smartphone में fluid layout उसके screen में fit आने के लिए shrink down कर लेगा. जिससे text का size बहुत छोटा और unreadable हो जाएगा. इसे पढ़ने के लिए आपको site की text portion को magnify करना होगा।

Responsive Layout: एक responsive layout अपने आप को screen resolution के अनुसार change करते रहता है और अलग अलग devices के अनुसार उसकी readability भी change होते रहता है, जिससे किसी भी devices में आसानी से read किया जा सकता है. For example, अगर कोई responsive site को smartphone से open करता है तो वह इसमे अपने sidebar को automatically नीचे कर लेगा, ताकि screen width अच्छे से set हो जाये. आज के समय मे इस layout का value सबसे अधिक है. हर user एक responsive layout वाले site को ज्यादा like करता है।

Responsive layout को हम css में ‘Media Queries’ का उपयोग करके achieve कर सकते हैं. इसमे अलग अलग screen के लिए media queries बनाये जाते हैं और इससे अलग अलग screen resolution को fit design किया जाता है।

अभी के समय मे mobile user सबसे अधिक पाए जाते हैं, जिससे यदि आपको कोई business website या blog बनाना है तो उसका responsive होना बहुत जरूरी है. Google भी responsive sites को बहुत ज्यादा value देते हैं. अगर कोई user में mobile से search करता है तो mobile SERPs में सबसे top पर responsive layout वाले sites ही होते हैं।

Different mobile screen में आपका site कैसा दिखता है? चेक करने के लिए http://mobiletest.me/ का use कर सकते हो।

Mobile site: कुछ websites के पास एक अलग mobile site होता है जो कि especially mobile users के लिए ही designed होता है. इसका मतलब उनके पास जो regular version होता है वो only desktop के लिए होता है. वो mobile के लिए एक अलग version बनाते हैं जो mobile में अच्छे से fit होते हैं. ऐसे sites में mobile user को mobile site में redirect करने के लिए redirection का use किया जाता है।

Hyperlink, Internal Link, External Link और Backlink क्या होते हैं?

Hyperlink: एक ‘hyperlink’ एक document से दूसरे document तक पहुंचने का तरीका होता है. आप किसी hyperlink पर click करेंगे तो वो आपको कोई दूसरा page में लेकर चल जाएगा।

HTML में hyperlink के लिए ‘a href’ tag का use किया जाता है. उदाहरण के लिए नीचे देखिए।

<a href="https://example.com/contact">Click here to contact me</a>

इस html में ‘Click here to contact me’ एक anchor text है. और जब आप इस anchor text पर click करेंगे तो वो आपको https://example.com/contact की page में लेकर चला जायेगा।

Anchor Text: ऊपर में आप example को देखर समझ ही गए होंगे. फिर भी हम आपको बता दें कि anchor text एक clickable text होता है, जिसपर click करने के बाद वो linked url में चला जायेगा।

Internal link: जब किसी website के post या page में उसी site के दूसरे webpage का URL linked या add किया होता है तो उसे internal link कहते है. यानी किसी website में उसी के कोई दूसरे page या post का link add करते हैं तो वह internal कहलायेगा।

External link: किसी website/webpage में दूसरे website/webpage का link को add करते हैं तो वह external link कहलाता है।

Backlink: अगर कोई website A और website B है. अगर website A में website B का link add किया है तो यानी website B को website A से backlink मिल रही है. यह दो प्रकार के होते हैं. Nofollow और Dofollow. Nofollow backlink की value नही होता है, क्योंकि यह link juice pass नही करता है. Dofollow backlink site की search ranking को increase करने में मदद करता है।

Google Bot क्या है? और Google कोई webpage को index कैसे करता है?

Google एक search engine है, जिसमे websites की list होती है. जब हम किसी query को इसमे search करते हैं तो उससे relevant sites वहाँ पर display होने लगती है. Actually, यह result show करने में 1 second से ज्यादा नही लेता है।

Google अपने users को जल्द से जल्द result show करने के लिए Google इंटरनेट पर मौजूद सारे websites को index करता है और informations को एक database के अंदर रखता है.

जब कोई google में कुछ search करता है तो google simply अपने database को access करके result show कर देता है ताकि कम से कम समय मे result show हो. Results जो होते हैं वो algorithm (ranking algorithm) के हिसाब से arranged होते हैं. कोई भी website को उसके quality और performance के हिसाब से rank दिया जाता है।

Google इस program को follow करता है और वो अपने users को relevant content के link को दिखा पाता है. इसी program को हम googlebot भी कहते हैं।

इसलिए हम सरल भाषा मे कह सकते हैं कि googlebot links को crawl और index करता है. किसी website को index करने के लिए उसके सभी internal links को crawl किया जाता है।

जब Googlebot किसी website को crawl करता है तो यह सिर्फ उसके html source code को ही देखता है. इसे आप अपने site की source code check करके देख सकते हो. इसके लिए आपको CTRL + U का उपयोग करना होगा।

Robots.txt, Robots Meta Tag और NoFollow Attribute क्या होता है?

Robots.txt: एक website के owner होने के नाते आप robots.txt का इस्तेमाल search engine किस page या post को दिखाना है और किस पोस्ट को index नही करना है, के लिए कर सकते हो।

यह आपके site की root directory में public_html में होता है. आप इस file को किसी भी directory में रख सकते हो. Search engine किसी भी site को crawl करने से पहले उसके robots.txt file को check करता है और उसमें बताये गए rules को follow करता है. अगर उसमे किसी page को noindex का rule add किया गया है तो search engine में वो index नही होगा।

Robots Meta Tag: किसी webpage को search engine में index या noindex करने के लिए उसके head section में कुछ codes का use किया जाता है. उसे ही हम robots meta tag बोलते हैं।

अगर किसी page को noindex करना है तो कुछ इस तरह का meta tag को site के head में add करना होगा।

<META NAME="ROBOTS" CONTENT="NOINDEX, NOFOLLOW">

अगर किसी webpage या section को search engine में index करना है तो कुछ इस तरह का tag use करना होगा।

<META NAME="ROBOTS" CONTENT="NOINDEX, FOLLOW">

Nofollow attribute: इसका use किसी hyperlink में search engine bot को follow नही करने के लिए कहा जाता है. जिस link में nofollow का tag होता है वो link juice pass नही करता है, जिसके कारण search engine उसे follow नही करता है.

SERP क्या होता है?

SERP किसी search engine का search result page होता है. जब आप Google में कुछ search करते हो तो results जो show होता है, उसी page को SERPs कहा जाता है।

SERP दो तरह के results provide करते हैं. Organic और Paid results दोनों ही SERPs में show होते हैं.

Organic results: यह free results होता है, यानी किसी site को free में show करता है. यहाँ site की quality और उसके ranking के हिसाब से index किया जाता है।

Paid/Sponsored Results: Paid results CPC (cost per click) के हिसाब से work करता है. जो sites SERPs में index होने के लिए high amount pay करते हैं तो उसे top में show किया जाता है. Generally, paid results organic results के ऊपर, नीचे या sidebar में show होते हैं. Google में paid results को top में show किये जाते हैं. Google में अपने site को paid results में show करने के लिए आपको adwords program join कर्मा होगा और pay करना होगा।

Note: जब कोई mobile phone में search results display होता है तो वह Mobile SERPs कहलाता है।

SEO – Search Engine Optimization क्या है?

SEO एक process है, अपने website को search engine के लिए optimization करने का ताकि आपके site search engine में higher rank कर पाए।

SEO को दो part में बंटा गया है।

On-Page SEO: अपने website में optimization करना ताकि ज्यादा search engine friendly हो पाए. जैसे Adding informative title tags, meta tags and alt tags, removing duplicate content, removing bad quality pages, writing good quality content, adding internal links etc. ये सभी on-page seo के अंदर आता है।

Off-Page SEO: इसमे जो भी काम होता है वो सभी site के बाहर किया जाता है. जैसे high quality के backlinks बनाना ताकि page authority increase हो सके. ये सभी off-page seo में होता है।

Google Search Console क्या होता है?

Google search console या Google Webmaster tools गूगल के द्वारा एक free service है. जिसका उपयोग हम अपने site की perform monitor करने के लिए और search results में ज्यादा better perform करने के लिए कर सकते हैं. अभी हाल ही में गूगल ने इसे update कीट है और इसमे कुछ नए useful tools को add भी किया है।

आइए जानते हैं कि हम Google Search Console की मदद से क्या क्या कर सकते हैं?

  • Check duplicate title/meta tags.
  • Check and monitor backlinks.
  • Monitor organic traffic and rankings in Google search results.
  • Check mobile usability errors.
  • Check crawl errors.
  • Test Robots.txt file.
  • Add structured data.
  • Add Sitemap.
  • Add URL to index.

Final Throughts,
ऊपर में बताई गई सारी बातें, के ब्लॉगर के लिए जानना बेहद जरूरी है. यह सभी basic knowlegde है. अगर आप इन basic technical things के बारे में जानेंगे तभी आप ब्लॉगिंग को सही से कर पाएंगे. अगर आप नए ब्लॉगर हो तो इन सभी बातों को याद रखें. अगर आपको ऊपर कही समझने में दिक्कत हुई हो तो comment करके जरूर बताएँ।


I hope की आपको यह post पसंद आया होगा. और अगर आपको इस post कुछ नया सीखने को मिला तो कुछ समय देकर इसे social media में share जरूर करें।

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14 thoughts on “Beginner Blogger Ko 20 Technical Things Ke Bare Me Janna Chahiye”

  1. नए ब्लॉगर के लिए बहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी, यह लेख इतना ज्यादा ज्ञानवर्धक है की इससे न सिर्फ नए ब्लॉगर को नॉलेज मिलेगी, बल्कि पुराने ब्लॉगर्स को भी काफी कुछ नया जानने को मिला. ऐसी ही ब्लॉग्गिंग से जुड़ी हुई बढ़िया-बढ़िया जानकारी और लेख लिखते रहे.. धन्यवाद अरशद नूर जी…

    Reply
  2. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने ऐसे ही आप नई नई जानकारिया देते रहे
    बहुत धन्यवाद आपका

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