“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध – Essay on “Cleanliness is more than devotion” in Hindi

स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 1 (100 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, कहावत का अर्थ है कि स्वच्छता भक्ति या देवत्व के मार्ग की ओर ले जाती है। पर्याप्त स्वच्छता के माध्यम से हम स्वंय को शारीरिक और मानसिक रुप से स्वच्छ रख सकते हैं, जो हमें वास्तव में अच्छा, सभ्य और स्वस्थ मनुष्य बनाती है। स्वच्छता शारीरिक, मानसिक और सामाजिक भलाई की भावना लाती है और अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करने में मदद करती है और इस प्रकार, दूसरों को प्रभावित करती है। स्वच्छता एक व्यक्ति के साफ कपड़े और अच्छे व्यक्तित्व के माध्यम से उसके अच्छे चरित्र को दिखाती है। अच्छे चरित्र वाले लोग अपने जीवन में नैतिक और धार्मिक होते हैं। स्वच्छता शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को साफ रखने के द्वारा अच्छे चरित्र को उदित करती है।

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 2 (150 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, कहावत प्रसिद्ध कहावत है, जो हमें बताती है कि, स्वच्छता का अभ्यास करना बहुत अच्छी आदत है और हमें जीवन के प्रत्येक चरण में हमारे शरीर, मन और आत्मा को शान्त और स्वच्छ रखने के द्वारा अच्छाई की ओर ले जाती है। स्वच्छ रहना हम सभी के लिए स्वस्थ शरीर, मन और जीवन में असीमित सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

स्वच्छता बनाए रखना, स्वस्थ जीवन जीने का आवश्यक भाग है, क्योंकि यह केवल स्वच्छता ही है, जो आन्तरिक और बाहरी रुप से साफ रखने के द्वारा हमारे व्यक्तित्व में सुधार करने में मदद करती है। स्वच्छता सभी की जिम्मेदारी है और हमें अपने आस-पास के क्षेत्र में स्वच्छता को बनाए रखना चाहिए। एक स्वच्छ शरीर हमें स्वस्थ और चिकित्सकों से दूर रखता है, इस प्रकार हमारे चिकित्सकीय व्ययों और समय की हानि को कम करता है। स्वच्छता मस्तिष्क में अच्छे और सकारात्मक विचारों को लाती है, जो रोगों के होने की दर को धीमा करती है।

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 3 (200 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, यह एक सामान्य सी आम कहावत है, जो हमें हमारे दैनिक जीवन में अच्छाई की भावना को प्राप्त करने के लिए स्वच्छता को बनाए रखने के लिए बढ़ावा देती है। यह हमारे जीवन में स्वच्छता के महत्व को प्रकाशित करती है और हमें जीवनभर स्वच्छता की आदत का पालन करने की सीख देती है। स्वच्छता ने केवल स्वंय को स्वच्छ रखना है, बल्कि इसका अर्थ व्यक्तिगत स्वच्छता और सकारात्मक विचारों को लाने के द्वारा शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की स्वच्छता बनाए रखना है। “स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, जिसका अर्थ है, स्वच्छता बनाए रखना और अच्छा सोचना व्यक्ति को भगवान के करीब लाता है। अच्छे स्वास्थ्य और नैतिक जीवन जीने के लिए स्वच्छ रहना बहुत महत्वपूर्ण है।

See also  जनरेशन गैप (पीढ़ी अंतराल) पर निबंध - Essay on Generation Gap in Hindi

एक साफ और अच्छी तरह से तैयार हुआ व्यक्ति प्रभावशाली आदतों के साथ अच्छे व्यक्तित्व और अच्छे चरित्र को इंगित करता है। एक व्यक्ति के अच्छे चरित्र का मूल्यांकन साफ कपड़ों और अच्छे व्यवहार के द्वारा किया जाता है। शरीर और मन की स्वच्छता किसी भी व्यक्ति के आत्म सम्मान में सुधार करती है। शरीर, मन और आत्मा की स्वच्छता भक्ति की ओर ले जाती है, जो अन्ततः शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से एक व्यक्ति में अच्छाई की भावना लाती है। एक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, जीवन में कड़े अनुशासन और निश्चित सिद्धान्तों का पालन करने की आवश्यकता है। वे लोग जो स्वच्छ रहते हैं, वे आमतौर पर धार्मिक और स्वभाव में भगवान से डरने वाले होते हैं और दूसरों से कभी भी नफरत और जलन महसूस नहीं करते हैं।

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 4 (250 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, एक प्रसिद्ध कहावत है, जो हमारे लिए बहुत कुछ प्रदर्शित करती है। यह इंगित करती है कि, स्वच्छता स्वस्थ जीवन का भाग है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि, स्वच्छता की आदत हमारी परंपरा और संस्कृति है। हमारे बुजुर्ग हमें हमेशा सही तरह से साफ रहना सिखाते हैं और हमें भगवान की प्रार्थना करने के साथ ही सुबह नाहने के बाद नाश्ता करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे हमें सही ढंग से हाथ धोने के बाद भोजन करना, और पवित्र किताबों या अन्य वस्तुओं को छूना सिखाते हैं। यहाँ तक कि, कुछ घरों में रसोई घर और पूजा घर में बिना नहाए जाने पर प्रतिबंध होता है। पुजारी भगवान के सामने उपस्थित होने या किसी भी पूजा या कथा में शामिल होने से पहले सही ढंग से नहाने, हाथ धोने और स्वच्छ कपड़े पहनने के लिए कहते हैं। यहूदियों में भोजन ग्रहण करने से पहले हाथ धोने की कड़ी परंपरा है।

व्यक्तिगत स्वच्छता और एक व्यक्ति के नैतिक स्वास्थ्य के बीच में बहुत करीबी संबंध है। व्यक्तिगत स्वच्छता को शरीर और आत्मा की शुद्धता माना जाता है, जो स्वस्थ और आध्यात्मिक संबंध को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। वे लोग जो प्रतिदिन स्नान नहीं करते हैं या गन्दे कपड़े पहनते हैं, वे आमतौर पर आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और अच्छाई की भावना को खो देते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं कि, व्यक्तिगत स्वच्छता हमें बेईमानी से सुरक्षित करती है। स्वच्छता के सभी लाभ इन सवालों को साबित करते हैं कि, धार्मिक लोग और धर्म के प्रवर्तकों ने स्वच्छता की प्रथा को धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान क्यों आवश्यक बनाया है। नियमित और सही ढंग से की गई स्वच्छता हमारे शरीर को लम्बे समय तक कीटाणुओं से दूर करने में मदद करती है और हमारी भक्ति को बनाए रखती है।

See also  शिक्षक दिवस पर निबंध - Essay on Teacher's Day in Hindi

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 5 (300 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, कहावत के अनुसार हम कह सकते हैं कि, स्वच्छता भक्ति के लिए रास्ता है और बिना स्वच्छता के हम भक्ति प्राप्त नहीं कर सकते हैं। भारत में बहुत से महान लोग और समाज सुधारकों (जैसे- महात्मा गाँधी, आदि) ने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रुप से स्वच्छ रहने के लिए वैयक्तिक और आस-पास की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए कठिन परिश्रम किया था। आजकल, स्वच्छ भारत अभियान, भारत के प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी के द्वारा भारत में आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए चलाया जा रहा है।

इससे भी पहले बहुत से स्वच्छता कार्यक्रमों को चलाया गया था हालांकि, आम जनता का सही सहयोग न मिलने के कारण सभी असफल रहे। स्वच्छता के समान उद्देश्यों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस को हर साल मनाया जाता है। हमने पश्चिमी सभ्यता से बहुत कुछ ग्रहण किया है हालांकि, उनके शिष्टाचारों और साफ-सफाई व स्वच्छता से संबंधित आदतों को नहीं अपना पाए हैं। स्वच्छता नजरिया का मामला है, जो आम जनता में स्वच्छता के बारे में पर्याप्त जागरुकता के माध्यम से संभव है। स्वच्छता एक गुण है, जिस पर पूरी तरह से नियंत्रण करने के लिए सभी आयु वर्ग और पद के लोगों में बढ़ावा देना चाहिए। पर्याप्त और नियमित स्वच्छता अच्छा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मा और मन की पवित्रता लाती है। शरीर और मन की स्वच्छता आध्यात्मिक और सकारात्मक सोच के साथ ही आसानी से प्रकृति से जुड़ने में मदद करती है।

वे लोग जो अपनी स्वच्छता को बनाए नहीं रखते हैं, वे आमतौर पर बहुत से कारणों; जैसे- शारीरिक समस्याओं, मानसिक परेशानियाँ, बीमारियाँ, नकारात्मक सोच आदि से परेशान रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, वे लोग जो व्यक्तिगत साफ-सफाई से रहते हैं, वे हमेशा खुश रहते हैं, क्योंकि वे सकारात्मक सोच को विकसित करते हैं जो शरीर, मन और आत्मा को सन्तुलित करने में मदद करती है।

See also  अनुशासन पर निबंध - Essay on Discipline in Hindi

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है” पर निबंध 5 (300 शब्द)

“स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है”, कहावत के अनुसार हम कह सकते हैं कि, स्वच्छता भक्ति के लिए रास्ता है और बिना स्वच्छता के हम भक्ति प्राप्त नहीं कर सकते हैं। भारत में बहुत से महान लोग और समाज सुधारकों (जैसे- महात्मा गाँधी, आदि) ने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रुप से स्वच्छ रहने के लिए वैयक्तिक और आस-पास की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए कठिन परिश्रम किया था। आजकल, स्वच्छ भारत अभियान, भारत के प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी के द्वारा भारत में आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए चलाया जा रहा है।

इससे भी पहले बहुत से स्वच्छता कार्यक्रमों को चलाया गया था हालांकि, आम जनता का सही सहयोग न मिलने के कारण सभी असफल रहे। स्वच्छता के समान उद्देश्यों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस को हर साल मनाया जाता है। हमने पश्चिमी सभ्यता से बहुत कुछ ग्रहण किया है हालांकि, उनके शिष्टाचारों और साफ-सफाई व स्वच्छता से संबंधित आदतों को नहीं अपना पाए हैं। स्वच्छता नजरिया का मामला है, जो आम जनता में स्वच्छता के बारे में पर्याप्त जागरुकता के माध्यम से संभव है। स्वच्छता एक गुण है, जिस पर पूरी तरह से नियंत्रण करने के लिए सभी आयु वर्ग और पद के लोगों में बढ़ावा देना चाहिए। पर्याप्त और नियमित स्वच्छता अच्छा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मा और मन की पवित्रता लाती है। शरीर और मन की स्वच्छता आध्यात्मिक और सकारात्मक सोच के साथ ही आसानी से प्रकृति से जुड़ने में मदद करती है।

वे लोग जो अपनी स्वच्छता को बनाए नहीं रखते हैं, वे आमतौर पर बहुत से कारणों; जैसे- शारीरिक समस्याओं, मानसिक परेशानियाँ, बीमारियाँ, नकारात्मक सोच आदि से परेशान रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, वे लोग जो व्यक्तिगत साफ-सफाई से रहते हैं, वे हमेशा खुश रहते हैं, क्योंकि वे सकारात्मक सोच को विकसित करते हैं जो शरीर, मन और आत्मा को सन्तुलित करने में मदद करती है।

Like the post?

Also read more related articles on BloggingHindi.com Sharing Is Caring.. ♥️

Sharing Is Caring...

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

×