बाघ पर निबंध – Essay on Tiger in Hindi

बाघ पर निबंध 1 (100 शब्द)

बाघ (राष्ट्रीय पशु) का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस है। यह एक मांसाहारी जानवर है, जो स्तनधारियों की श्रेणी में आता है, क्योंकि यह भी मनुष्यों की तरह बच्चों को जन्म देता है। यह बिल्लियों के परिवार के अन्तर्गत सबसे बड़ा जीवित सदस्य है। यह लगभग पूरे एशिया में, विशेषरुप से भूटान, तीन, भारत और साइबेरिया जैसे देशों में पाए जाते हैं। बंगाल टाइगर आमतौर पर सुन्दरवन (पानी वाला जंगल) में पाए जाते हैं, जो अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों सहित बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में स्थित है। वे विभिन्न रंगों विशेष रूप से, सफेद, नीले और काले रंग की धारियों के साथ नारंगी रंग में पाए जाते हैं। उनके ऊपरी शरीर पर काली धारियों उन्हें शिकार करते समय शिकार से दूर छिपने में मदद करती हैं। प्रत्येक और हरेक बाघ के शरीर पर धारियों के अलग-अलग पैटर्न होते हैं।

बाघ पर निबंध 2 (150 शब्द)

बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। यह अपनी शाही दिखावट के कारण राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया है। यह बहुत ही ताकतवर पशु है, जो अपने आकर्षण, शक्ति और चपलता के कारण बहुत प्रसिद्ध है। यह एशियन मांसाहारी पशु है, जिसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस है। बाघ की बहुत सी प्रजातियाँ और उपप्रजातियाँ हैं, जो पूरे विश्व भर में पाई जाती है।

बाघ एक लुप्तप्राय प्रजाति है हालांकि, पूरे विश्व में (बाघ जनगणना के अनुसार) बहुत कम ही बाघ बचे हैं, जिनका पृथ्वी पर, हमें किसी भी तरीके से जीवन को बनाए रखने के लिए संरक्षण करना पड़ेगा। भारतीय सरकार ने भारत में बाघों की संख्या को बनाए रखने के लिए और उनके जीवन को संरक्षित करने के लिए अप्रैल 1973 में “प्रोजेक्ट टाइगर” के नाम से कार्यक्रम को शुरु किया है। यह बहुत ही खुशी की बात है कि “प्रोजेक्ट टाइगर” अभियान के कारण भारत में बाघों की आबादी आरामदायक (संतोषजनक) स्थिति में है।

बाघ पर निबंध 3 (200 शब्द)

बाघ एक राष्ट्रीय पशु है, जो बिल्ली के परिवार के अन्तर्गत आता है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस है। यह बिल्ली के परिवार के सबसे बड़े जानवर के रुप में जाना जाता है। यह विभिन्न रंगों; जैसे – शरीर पर अलग-अलग काली धारियों के साथ नारंगी, सफेद, और नीला रंग का पाया जाता है। वे ऊपरी तौर पर अलग हो सकते हैं, पर उनके नीचे का पेट वाला भाग एक ही तरह सफेद रंग का होता है। बंगाल टाइगर की उत्पत्ति साइबेरिया में हुई थी, हालांकि, ठंडे मौसम के कारण वे दक्षिण की तरफ चले गए। अब, रॉयल बंगाल टाइगर की प्राकृतिक विरासत भारत है। बंगाल टाइगर 7 से 10 फीट लम्बे और इनका वजन 350 से 550 लीब्स तक हो सकता है।

वे प्रजातियों, उपजातियों और स्थानों के आधार पर अलग-अलग आकार और वजन के पाए जाते हैं। साइबेरियन टाइगर को सबसे बड़ा बाघ माना जाता है। मादा बाघ, नर बाघ से थोड़ी छोटी होती है। कुछ दशक पहले, बाघों की प्रजाति निरंतर खतरे में थी हालांकि, भारत में “प्रोजेक्ट टाइगर” के कारण स्थिति नियंत्रण में है। पहले मनुष्यों द्वारा उनका शिकार बहुत से उद्देश्यों; जैसे – खेल, परंपरा, चिकित्सक दवाइयाँ आदि के लिए भारी मात्रा में किया जाता था। “प्रोजेक्ट टाइगर” की पहल भारत सरकार के द्वारा अप्रैल 1973 में बाघों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए की गई थी। बाघों के जीवन को सबसे अधिक खतरा वनों के उन्मूलन के कारण है, जिसके कारण उनकी प्रजातियों को हानि पहुँच रही है और वे दूसरे स्थानों के लिए प्रवास कर रहे हैं।

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राष्ट्रीय पशु बाघ पर निबंध 4 (250 शब्द)

बाघ एक जंगली जानवर है, जिसे भारत में भारतीय सरकार के द्वारा राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया है। यह सबसे निर्दयी जंगली पशु माना जाता है, जिससे सभी भयभीत होते हैं। यह बहुत ही ताकतवर पशु है, जो लम्बी दूरी तक छलांग लगा सकता है। यह बहुत ही शान्त दिखता है हालांकि, बहुत ही चालाक होता है और बहुत अधिक दूरी से भी अपने शिकार को पकड़ लेता है। यह दूसरे पशुओं; जैसे – गाय, हिरन, बकरी, खरगोश (कभी-कभी अवसर के अनुसार मनुष्यों को भी) आदि के खून और मांस का बहुत अधिक शौकीन होता है। बाघ को जंगल का भगवान कहा जाता है, क्योंकि इन्हें देश में जंगली जीवन में धन का प्रतीक माना गया है। बाघ ताकत, आकर्षक, बहुत अधिक शक्ति और चपलता का मिश्रण होता है, जो इसके आदर और सम्मान का बहुत बड़ा कारण है। यह अनुमान लगाया गया है कि, कुल बाघों की संख्या का आधा भाग भारत में रहता है। यद्यपि, पिछले कुछ दशकों में, भारत में बाघों की संख्या में निरंतर बड़े स्तर पर कमी आई है। भारत की सरकार द्वारा “प्रोजेक्ट टाइगर” को 1973 में, देश में शाही पशु के अस्तित्व को बचाने के लिए शुरु किया गया था।

बाघों की लगभग आठ प्रजातियाँ होती हैं और भारतीय प्रजाती को रॉयल बंगाल टाइगर कहा जाता है। बाघ (उत्तरी-पश्चिमी भाग को छोड़कर) लगभग पूरे देश में पाए जाते हैं। प्रोजेक्ट टाइगर अभियान को शुरु करने के कुछ वर्ष बाद ही, भारत में बाघों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। 1993 की बाघों की जनगणना के अनुसार, देश में बाघों की कुल संख्या लगभग 3,750 थी। प्रोजेक्ट टाइगर के अन्तर्गत लगभग पूरे देश में 23 संरक्षण केन्द्रों (33,406 वर्ग किलो.मी. के क्षेत्र में) की स्थापना की गई थी।

बाघ पर निबंध 5 (300 शब्द)

बाघ एक जंगली जानवर है और भारत के राष्ट्रीय पशु के रुप में जाना जात है। यह लगभग बिल्ली की तरह होता है क्योंकि यह बिल्ली के परिवार के अन्तर्गत आता है। यह बड़े दाँत और लम्बी पूँछ रखता है। यह विभिन्न रंगों का होता है (जैसे – सफेद, नीला, और नारंगी) हालांकि, सभी के शरीर पर काली धारियाँ होती हैं। यह कुछ ही मिनटों में बड़ी-बड़ी छलांगों के साथ बहुत लम्बी दूरी तक दौड़ सकता है, क्योंकि इसे भगवान द्वारा उपहार के रुप में तेज पंजों के साथ गद्देदार पैर प्रदान किए हैं। इसके चार दाँत (दो ऊपर के जबड़े में दो नीचे के जबड़े में) बहुत ही नुकीले, तेज और मजबूत होते हैं, जो भोजन की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से शिकार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। बाघ की लम्बाई और ऊँचाई क्रमशः 8 से 10 फीट और 3 से 4 फीट होती है।

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यह एक मांसाहारी पशु है और खून और मांस का बहुत ही शौकीन होता है। यह कभी-कभी जंगल से किसी पशु यहाँ तक कि, मनुष्य को भी भोजन के रुप में खाने के लिए गाँवों की ओर जाते हैं। यह अपने शिकार (जैसे – हिरन, जेबरा और अन्य जानवरों) पर अपनी बहुत मजबूत पकड़ रखता है और उन पर मजबूत जबड़ों और तेज पंजों के माध्यम से अचानक आक्रमण करता है। आमतौर पर, यह दिन के दौरान सोता है और रात के समय शिकार करता है। जंगली जानवरों को भोजन की आवश्यकता और जरुरत के बिना मारना इसकी प्रकृति और शौक है, जो इसकी अन्य जानवरों के सामने ताकत और शक्ति प्रदर्शित करती है। यही कारण है कि, यह बहुत ही क्रूर और निर्दयी पशु के रुप में जाना जाता है।

भारत में बाघ आमतौर पर सुन्दर वन (असम, पश्चिमी बंगाल, त्रिपुरा, मध्य भारत आदि) में पाए जाते हैं। अधिक बड़े चीते अफ्रीकी जंगलों में पाए जाते हैं हालांकि, सभी में रॉयल बंगाल टाइगर सबसे अधिक सुन्दर लगते हैं। बाघों को मारना, उस समय से पूरे देश में निषेध है, जब उनकी संख्या में बहुत तेजी से गिरावट हो रही थी। अभी तक बाघों की छः जीवित प्रजातियाँ (जैसे – बंगाल टाइगर, साइबेरियन बाघ, सुमनत्रन बाघ, मलयान बाघ, ईडो-चाइनीज़ बाघ और दक्षिणी चीनी बाघ) पाई जाती है और तीन प्रजातियाँ अभी हाल ही में विलुप्त हो गई हैं (जवन टाइगर, कैस्पियन टाइगर और बाली टाइगर)।

बाघ (टाइगर) पर निबंध 6 (400 शब्द)

बाघ बहुत ही हिंसक जानवर है। यह भारतीय सरकार के द्वारा राष्ट्रीय पशु के रुप में घोषित किया गया है। यह इस ग्रह पर सबसे अधिक ताकतवर, शक्तिशाली और आकर्षक पशु माना जाता है। यह घने जंगलों में रहते हैं हालांकि, कभी-कभी वनों की कटाई के कारण भोजन की तलाश में गाँवों और अन्य आवासीय स्थानों में भी घुस आता है। साइबेरियन बाघ आमतौर पर ठंड़े स्थानों पर रहते हैं हालांकि, रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ) जंगलों में नदी के किनारे रहते हैं, यही कारण हैं कि, वे अच्छी तरह से तैरना भी जानते हैं। कुछ दशक पहले, बाघों का लोगों द्वारा अपने विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, जिसमें गैर-कानूनी कार्य भी शामिल है; जैसे – शरीर के अंगों, खाल (त्वचा), हड्डियों, दाँतों, नाखूनों आदि की तस्करी के लिए बड़े स्तर पर शिकार किया जाता था। इसके परिणाम स्वरुप पूरे भारत में बाघों की संख्या में बहुत अधिक कमी आई। बाघ अन्य देशों में भी पाए जाते हैं; जैसे – बांग्लादेश, कम्बोडिया, थाइलैंड, लॉस, चीन, इन्डोनेशिया, म्यांमार, नेपाल, मलेशिया, रुस, वियतनाम, भूटान, आदि।

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बाघ एक मांसाहारी जानवर है, जो रात को शिकार करता है हालांकि, दिन में सोता है। बाघ बहुत ही मजबूत और ताकतवर शरीर रखता है, जिसकी सहायता से ये बहुत ऊँचाई तक (लगभग 7 फीट तक) छलांग सकता है और बहुत अधिक दूरी तक (लगभग 85 किलो/घंटा की रफ्तार से) दौड़ सकता है। इसके नीले, सफेद और नारंगी शरीर पर काली धारियाँ इसे वास्तव में, आकर्षक और सुन्दर बनाती है। इसे बहुत अधिक दूरी से अपने शिकार को पकड़े के लिए प्राकृतिक रुप से मजबूत जबड़े, दाँत और तेज पंजे प्राप्त है। यह माना जाता है कि, इसकी लम्बी पूँछ, शिकार के पीछे भागते हुए इसका नियंत्रण बनाए रखती है। एक बाघ लगभग 13 फीट लम्बा और 150 किलो वजन का होता है। एक बाघ को उसके शरीर पर अद्वितीय धारियों से पहचाना जा सकता है।

एक राष्ट्रीय पशु के रुप में टाइगर (बाघ)

बाघ को इसी शक्ति, ताकत और चपलता के कारण भारत का राष्ट्रीय पशु चुना गया है। यह अपने जंगल का राजा और रॉयल बंगाल टाइगर के जैसे नामों के कारण भी राष्ट्रीय पशु चुना गया है।

प्रोजेक्ट टाइगर क्या है?

प्रोजेक्ट टाइगर भारतीय सरकार के द्वारा चालाया जाने वाला अभियान है। यह अभियान भारत में बाघों की संख्या को बनाए रखने और उन्हें सुरक्षित करने के लिए शुरु किया गया है। इस अभियान की शुरुआत 1973 में बाघों को विलुप्त होने के संकट से बचाने के लिए की गई थी। यह योजना देश में बचे हुए बाघों को सुरक्षित करने के साथ ही उनकी प्रजाति में प्रजनन के माध्यम से संख्या में वृद्धि करने पर केन्द्रित है। पूरे देश में बाघों की सुरक्षा और प्राकृतिक वातावरण प्रदान करने के लिए लगभग 23 बाघ अभ्यारणों को बनाया गया है। इस योजना के बाद, 1993 में हुई जनगणना में, बाघों की संख्या में इससे उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। यद्यपि, भारत में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन, इस योजना में व्यय किए गए धन की तुलना में देश में बाघों की संख्या अभी भी संतोषजनक नहीं है।

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